AMAN AJ

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आई नोट , भाग 48

    

    अध्याय-9
    मैं अच्छा हूं या बुरा 
    भाग-2
    
    ★★★
    
    आशीष के घर के सारे ही सदस्य नीचे आ चुके थे। आशीष की मां आशीष के पिता के बगल में बैठी थी। सोम्या ( आशीष की बहन) सीढीयो के पास बैठी हुई थी। नौकर चाकर एक तरफ कतार बना कर खड़े थे। सबके चेहरे खामोश थे। कोई भी शख्स की तरफ नहीं देख रहा था। नौकरों के चेहरे झुके हुए थे। सोम्या सीढ़ियों की रेलिंग को देख रही थी। आशीष की मां अपने हाथों को ठोढ़ी के नीचे रख कर बैठी थी। आशीष के पिता के दोनों हाथ अपने घुटनों पर थे। देवराज एक हाथ सोफे पर‌ रखकर खड़ा था जबकि दूसरा हाथ बाहर ही लटक रहा था।
    
    “क्या तुम बताओगे....” आशीष के पिता ने शख्स की तरफ देखा और अपन दोनों हाथ झुलाते हुए कहा “आखिर तुम्हें मेरा बेटा क्यों चाहिए? क्या बिगाड़ा है उसने तुम्हारा?”
    
    शख्स किचन के पास अपनी पीठ दीवार के साथ लगाकर खड़ा था। उसके हाथ में जो रोड़ थी वो उसके दूसरे हिस्से को बिल्कुल नजदीक से देख रहा था।
    
    आशीष के पिता ने पूछा तो उसने अपनी रोड़ नीचे की और सामने की तरफ चलने लगा। सामने टेबल के पास आने के बाद उसने आंखें मोटी कर आशीष के पिता को देखा और टेबल पर मौजूद पानी के गिलास को उठाकर उसके गुट भरने लगा।
    
    पूरे घर में इस कदर शांति थी कि पानी पीते हुए शख्स के गुट की आवाज जोर-जोर से सबको सुनाई दे रही थी।
    
    पानी पीने के बाद उसने गिलास जोर से टेबल पर रखा, जिससे आवाज हुई और सभी सहम गए। 
    
    “आशीष...” शख्स बोला और पलटकर दूसरी तरफ चलने लगा “एक माली किसी गुलदस्ते में एक फूल को बड़े ही प्यार से सजा कर रखता है। एक ऐसे फूल को जिसकी वजह से माली को उसकी जिंदगी मिली। तुम्हारे आशीष ने वह फूल तोड़ कर ले जाने की हिम्मत की है।”
    
    आशीष के पिता और आशीष की मां एक दूसरे को देखने लगे। “मैं कुछ समझा नहीं...” आशीष के पिता ने कहा।
    
    शख्स पलटा और वही पलाथी मारकर जमीन पर बैठ गया। उसका जमीन पर बैठना उसे और भी खतरनाक बना रहा था।
    
    पलाथी मारकर बैठने के बाद उसने कहा “उसने मेरी बिवी की तरफ नजर डाली है। उसे मुझसे दूर किया है।” इतना कहकर वह रोड़ को नीचे जमीन पर मारने लगा।
    
    “क्या!!” आशीष के पिता चौकें “मगर हमारा बेटा ऐसा नहीं कर सकता। उसके पास आखिर किस चीज की कमी है जो वह किसी दूसरे की बीवी की तरफ देखेगा। नहीं नहीं, मुझे तो इस पर यकीन ही नहीं हो रहा।”
    
    “तो तुम्हारे कहने का मतलब मैं झूठ बोल रहा हूं..”‌ शख्स बोला और खड़ा हो गया “बाहर मैंने दो चौकीदारों को रोड़ से मारा है, उसमें से एक तड़प रहा है जबकि दूसरा बेहोश पड़ा है। यानी यह सब मैंने बस मजाक के लिए किया है। फ्रैंक के तौर पर। मतलब....” वो चुप हुआ और इधर-उधर देखने लगा। अपने हाथ को मुट्ठी बनाकर वह खुद के गुस्से को कंट्रोल कर रहा था। तभी उसने हाथ खोला और चिल्लाते हुए बोला “चु@#@(# समझ रखा है क्या मुझे। मेरे को पागलपन का दौरा पड़ा था क्या जो मैं ऐसे सुबह सुबह तुम्हारे घर पर आकर रंडी रोना रो रहा हूं। मा@;;! ##-दो उसने मेरी बीवी पर हाथ डाला है, और मां कसम आज फाड़ कर उसे जमीन में गाड़ कर जाऊंगा।”
    
    शख्स का ऐसा बर्ताव देखकर सभी के माथों से पसीना टपकने लगा। आशीष की मां ने आशीष के पिता के हाथ पर हाथ रख दिया ताकि वह आगे कुछ ना बोले। 
    
    “समझ में नहीं आता तुम अमीर लोगों की बीमारी क्या है, जब देखो बस दूसरों की चीजों पर कब्जा करते रहते हो, कभी किसी की कंपनी खरीद ली, तो कभी किसी की पत्नी, मा':@₹+( कभी खुद का भी कुछ बना लिया करो।”
    
    कुछ देर तक सन्नाटा छाया रहा। किसी ने भी कुछ नहीं कहा।
    
    “हमारे बेटे की गलती के लिए मैं शर्मिंदा हूं...” काफी देर के बाद आशीष के मां हल्के ठंडे स्वर में बोली “हमने हमारे बेटे की परवरिश में किसी भी तरह की कमी नहीं रखी थी। लेकिन इसके बावजूद वह ऐसा कुछ करेगा, इसकी उम्मीद हमें नहीं थी। हम तुमसे इसके लिए माफी चाहते हैं। माफी भी चाहते हैं और तुमसे वादा भी करते हैं आशीष से बात कर हम इस मसले को सुलजाएंगे।”
    
    शख्स ने गुस्से को बढ़ाते हुए कहा “भाड़ में गया तुम्हारा वादा... भाड़ में गई तुम्हारी माफी... मेरा मसला मैं खुद सुलझा लूंगा।”
    
    इसके बाद वह वापिस चहलकदमी करने लगा। कुछ देर चहल कदमी करने के बाद वो चलता हुआ आशीष के पिता के पास आया और दोनों हाथ टेबल पर रख कर उसे पूछा “नहीं तुम्हारे बेटे को पता नहीं था कभी भी किसी शादीशुदा लड़की पर हाथ नहीं रखते। इस दुनिया में करोड़ों सिंगल लड़कीया हैं जिनकी शादी नहीं हुई। क्या उन्हें उसमें से कोई पसंद नहीं आई। फिर अमीर है, हैंडसम है, स्मार्ट लुक, खतरनाक पर्सनालिटी सब कुछ है, उसे तो कोई लड़की ना भी नहीं कर सकती थी।” शख्स कहकर वापस चहल कदमी करने लगा “पूरी दुनिया को छोड़ कर उसे सिर्फ... उसे सिर्फ मेरी बिवी अच्छी लगी।”
    
    “अब हम क्या कहें....वो....” आशीष के पिता कुछ बोलने वाले थे मगर बोलते बोलते रुक गए। उनके रुकते ही सभी उसकी तरफ देखने लगे। सोम्या भी।
    
    “वो क्या...” शख्स ने पुछा।
    
    “वो...” आशीष के पिता ने दोबारा कहने की कोशिश की “वो बचपन से ही ऐसा है। “वो कभी किसी की बात सुनता ही नहीं। हमेशा अपने मन की करता है।”
    
    शख्स ने यह सुना तो अपने हाथ पटके “मगर अब उसे सुननी पड़ेगी। अब उसे मेरी बात सुननी पड़ेगी। और मैं तो साला उसे अपने मन की भी नहीं करने दूंगा।”
    
    इतना कहकर उसने सिढियों के पास बैठी सौम्या को देखा और कहा “ऐ.... अपने भाई को फोन लगा और बुला उसे यहां” 
    
    “क्या...” सोम्या एकदम से बोली “वो‌ ऐसे बुलाने पर नहीं आएगा।”
    
    सोम्या ने सामने से मना किया तो शख्स को गुस्सा आ गया। उसने अपनी रोड़ को पकड़ा और जोर से टेबल पर मारकर उसे तोड़ते हुए कहा “तु बुलाती है या नहीं...”
    
    “हा हा...” सोम्या तुरंत फोन लाइन की तरफ भाग पड़ी। वहीं आशीष की मां और पिता डरकर अपने सामने टूटे हुए टेबल को देखने लगे।
    
    सोम्या ने जल्दी जल्दी फोन मिलाया “हेलो भाई..” जैसे ही सामने से उसके भाई ने फोन उठाया वह बोली “कहां हो आप.... जहां भी हो जल्दी घर आ जाओ। बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो गई है।”
    
    यह कहकर वह सामने से आने वाले जवाब को सुनने लगी। जवाब को सुनने के बाद सोम्या ने कहा 
    
    “क्या मतलब भाई आप नहीं आ सकते, इमरजेंसी है, आना होगा।”
    
    शख्स चिल्लाया और चिल्लाते हुए बोला “उसको बोल तेरा बाप जल्दी ऊपर जाने वाला है.... अभी आखिरी मौका है... आकर जीते जी उनकी शक्ल देख ले।”
    
    सोम्या और सब शख्स की तरफ देखने लगे। वो अब ज्यादा ही खतरनाक हो गया था। 
    
    सोम्या यह सुनकर रोने लगी। उसने रोते हुए अपने भाई से कहा “भाई आप जल्दी आ जाइए। पापा की जान खतरे में हैं। वो कभी भी... आप समझ रहे हैं ना... जल्दी आइए” 
    
    उसे सामने से जवाब मिला जिसके बाद उसने रोते हुए फोन काट दिया। फोन काटने के बाद वह सोफे के करीब आए और शख्स से रुआसे स्वर में कहा “भाई आ रहा... 1 घंटे में यहां पहुंच जाएगा...”
    
    “एक घंटा...” शख्स खुद‌ से बोला, मगर ऐसे कि वह सबको सुनाई दिया “तब तक मैं क्या करूंगा। मैं...तब...तक...क्या...करुगां” वह गुस्से में बोला। “किसी को मार दुं.... नहीं... मैं इतना भी बुरा नहीं हूं” कहते-कहते वह सोम्या की तरफ देखने लगा। वह रो रही थी। उसने अजीब के अंदाज में सौम्या से पुछा “तुम्हें खाना बनाना आता है..?”
    
    सब फिर से अजीब नजरों से शख्स को देखने लगे।
    
    “क्या..”‌सोम्या हैरानी वाले एक्सप्रेशन देते हुए बोली।
    
    “क्या....क्या...तेरी...” शख्स फिर से गुस्से में चिल्लाया “तेरे को एक ही बार में सुनाई नहीं देता क्या। मैंने पूछा खाना बनाना आता है...”
    
    सोम्या रोते हुए बोली “हां, हां आता है।”
    
    “तो जाओ और जाकर कुछ ऐसा बनाकर लेकर लाओ जो खाने में अच्छा हो। मुझे इंतजार पसंद नहीं। इंतजार में दिमाग खाली रहता है, और मेरे खाली दिमाग का मतलब है, बस बस और बस कुछ बुरा होना, चल‌ जा।” आखिर में उसने हल्का सा धमकी देने वाला अंदाज दिखाया।
    
    सोम्या ने तुरंत अपने आसुं साफ किए और किचन की तरफ दौड़ती हुई चली गई। उसके जाने के बाद शख्स आशीष के पिता को रोड़ लगाकर उसकी ठोढ़ी ऊपर करता हुआ बोला “तुम्हें अपनी बीवी से प्यार है ना.... वैसे ही जैसे मुझे है”
    
    आशीष का पिता अपनी पत्नी की तरफ देखने लगा।
    
    शख्स उसे बीच में रोकता हुआ बोला “मैंने तुझे बीवी को घूरने के लिए नहीं कहा था, बल्कि यह पूछा था तुम्हें अपनी बीवी से प्यार है या नहीं।”
    
    “हां है।” आशीष के पिता ने विनम्रता से जवाब दिया “लेकिन तुम्हें उसको नुकसान पहुंचाकर कुछ भी नहीं मिलने वाला। अगर बदला लेना है तो आशीष से लो।”
    
    “हां उसी से लूंगा बुढे... तुझे तो मैं कोई काम कहने वाला था..” शख्स बोला और अजीब सी हंसी हंसने लगा। इसके बाद वो हंसते-हंसते रुका और आशीष के पिता से कहा “बाहर एक चौकीदार गेट के पास घायल पड़ा है, एक बड़े से दरवाजे के पास, जा और जाकर उन्हें इस तरह से करके आ ताकि वह किसी को दिखे ना। मैं नहीं चाहता आशीष आए और वह उनकी हालत देखकर दरवाजे से ही वापस चला जाए। मुझ से रूबरू होने के लिए उसे यहां अंदर तक आना होगा।”
    
    आशीष के पिता देवराज की तरफ देखने लगे। जैसे ही उन्होंने देवराज की तरफ देखा देवराज बाहर की ओर जाने के लिए तत्पर हुआ मगर तभी शख्स ने उसे रोका और कहा “मैंने तुम्हें नहीं कहा था, मैंने इसे कहा था” उसने आशीष के पिता की तरफ इशारा किया “इसके बाहर जाने का मतलब यही जाएगा।” और कह कर आशीष के पिता को देखने लगा।
    
    आशीष के पिता के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। शिवाए बाहर जाने के। वह खड़े हुए और बाहर की तरफ चल पड़े।
    
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